लॉकडाउन में घर को निकले मजदूरों को जब लगी भूख तो सूखी झाड़ियों से बना दिया खाना

कहते है जब मजबूरी गले पड़ जाती है तो जो सपने में न सोचा हो वो भी करना पड़ जाता है। आज से सामने आई तस्वीरों को देखकर अंदाजा लग जाएगा कि जीवन में मजबूरी का सामना करते हुए किन कठिनाईयों से होकर गुजरना पड़ रहा है। जयपुर के खातीपुरा रेलवे स्टेशन के पास बने ब्रिज के नीचे की 3 परिवार के अलग-अलग लोगों ने थक हार कर कुछ घंटो के लिए अपना बसेरा बसाया है।
दरअसल ये लोग जोधपुर से 4 दिन पहले पैदल रवाना हुए। सर पर बोझा, गोद में बच्चे को लेकर तपती धूप में 350 किमी का सफर तय करते हुए जोधपुर से जयपुर पहुंचे और यहां से कोई बिहार के गया जिले में जा रहा है तो कोई उत्तर प्रदेश के बनारस। न जेब मे पैसे न कोई रोजगार और न खाने के लिए कोई राशन। अब इस हालात मे जैसे तैसे लोगों ने रास्ते में मदद की तो टूटे हुए बर्तन में सूखी झाड़ियों को जलाकर खाना बनाया और कच्चा पक्का जो भी मिला उससे पेट भरने की कोशिश कर रहे हैं।
से बातचीत में मजदूर रामेश्वर ने बताया, ''मैं चार दिन पहले अपनी पत्नि और  साल व 3 साल के बच्चो को लेकर जोधपुर से पैदल ही निकल गया क्योंकि न ही वहां रोजगार न हमें भेजने के लिए कोई मदद की जा रही है। सरकार ये कह तो रही है कि सबको ट्रेन व बस से भेजा जाएगा लेकिन हम दो वक्त की रोटी नहीं जुटा पा रहे है तो रजिस्ट्रेशन कहां से कराने जाएं और जिन लोगों के मोबाईल पर रजिस्ट्रेशन किया भी जा रहा है तो उनको 4 से 5 दिन तक कोई भी जवाब नहीं मिल रहा है। हालत ये है कि खुद ही 1200 किमी का सफर तय करने के लिए हम निकल पड़े है।'' उसने बताया, ''सुबह से न खाना खाया न पानी पीया, इस जगह पर कुछ लोगो ने खाने को दे दिया तो हमने भगौना लेकर दूध गर्म किया है ताकी बच्चों को पिला सकें।''
वहीं, जब इन हालात पर जयपुर कलेक्टर डॉक्टर जोगाराम से जवाब मांगा गया तो कलेक्टर भी सरकारी सिस्टम मे फंसे हुए दबी जुबान में जवाब देते नजर आए। उन्होंने कहा, ''जो गाईडलाईन सरकार ने तय की है उन्हीं के आधार पर सबकुछ किया जा रहा है लिहाजा बिना कारण किसी तरह अपनी जगह से लोग न जाए।'' सरकारी मुलाजिमो की बातों में लाचारी साफ दिखाई देती है क्योंकि नेताओं की नीतियों में खामिायां बहुत है ऐसे मे अब जो तस्वीरें सामने आ रही हैं वो हर किसी को झकझोर देती है और सरकारी सिस्टम पर तमाम सवाल भी उठाती है।