लॉकडाउन में अपने जिगर के टुकड़े को बचाने के लिए मां ने पसारा दिया अपना आंचल!

गरीबी लोगों को कहां तक लेकर जाती है, यह उस मां के पास जाने से मालूम हुआ। जो जवान बेटे की जिंदगी को बचाने लोगों के सामने आंचल फैलाने को मजबूर है। खुर्सीपार के बापू नगर में रहने वाला विल्सन महज 20 साल का है। उसकी दोनों किडनी खराब हो गई है। डॉक्टरों ने यह जानकारी उसकी मां को दी, जो दूसरों के घरों में काम कर परिवार का पालन करती है। बेटे को लेकर जब वह डायलिसिस करवाने हॉस्पिटल पहुंची। तब मालूम हुआ कि दवा और खून चढ़ाने में कितना खर्च आता है।
पीडि़त मां ने बताया कि कोरोना की वजह से घरों में काम भी बंद है। दवा तक लेकर नहीं आ पाए हैं। घर में खाने को अनाज ही नहीं है। तब दवा कहां से आएगा। जन प्रतिनिधियों के दफ्तर भी गए थे। सहयोग कुछ नहीं मिला है। दो कागज दोनों ने दिया है। बेटे की जान बच जाए, बस इतनी ही विनती कर रही हूं।

विल्सन का एक सप्ताह में तीन बार डायलिसिस हो रहा है। अब तक 50 बार उसका डायलिसिस हुआ है। मेडिकल स्टोर से दवा लेने के बाद पैसा नहीं दे पाए हैं। आसपास के लोगों ने खून दिया। उसे भी चढ़ाने के लिए जांच किया जाता है। उन प्रक्रिया में कम से कम 14 सौ रुपए लगता है। यह पैसा कहां से लाए। मां का कहना है कि वह बेटे को बचाने के लिए अपना किडनी देना चाहती है। इसके लिए जो प्रोसेस हैं और दोनों के जांच में जो खर्च आएगा। वह कहां से पूरा होगा। इस दौरान उसके जिगर के टुकड़े को कुछ हो न जाए। यह डर भी उसे सता रहा है। आंख में आंसू लिए वह लोगों से बार-बार सहयोग की अपील कर रही है।

मीडिया कम्पनी पत्रिका के सोशल मंच में मां ने जब गुहार लगाई तब कुछ लोगों ने आगे आकर उसकी मदद की है। समाज सेवी रज्जन अकील खान ने पीडि़त को सूखा राशन और नकद भी दिया। इसके साथ-साथ यह भी कहा कि वे आगे भी दवा वगैरह के लिए मदद करेंगे। मदद करने जब उनके घर समाज सेवी पहुंचे, तो मां की आंख भर आई। उसने कहा कि वह चाहती है जल्द बेटा पहले की तरह काम पर जाने लगे। वह खुद अपना किडनी बेटे को देने तैयार है।