लोटेे में भरकर खूब बिक रही है कंजर व्हिस्की, विदेशी नहीं तो देशी से ही काम चला रहे हैं शराबी

लॉक डाउन में शराब की दुकानें बंद होने से ब्लॉक में कच्ची शराब का कारोबार काफी फलफूल रहा है। कंजरों के डेरों पर बड़ी मात्रा में कंजर व्हिस्की (कच्ची शराब) बनाकर आदिवासी दफाइयों में महंगे दामों पर खपाई जा रही है। कच्ची शराब को पाउचों में भरकर गांवों में चोरी-छिप बेची जा रही है। क्षेत्र के कंजरों के डेरों पर कच्ची शऱाब बनाने का काम हमेशा ही चलता रहता है। 
आबकारी विभाग ने कई बार कंजरों के डेरों पर छापामार कार्रवाई कर बड़ी मात्रा में कच्ची शराब व उपकरण जब्त कर भट्टी नष्ट की है लेकिन कच्ची शराब बनाने का कारोबार खत्म नहीं हुआ। लेकिन इनदिनों लॉक डाउन के चलते शराब की दुकानें बंद हैं जिससे गांवों में कच्ची शराब की मांग बढ़ने से इसकी बिक्री भी बढ़ गई है। कंजर कच्ची शराब बनाकर केनों में भरकर आदिवासी बस्तियों के बाहर खेतों में ले जाते हैं और वहां पाउचों में भरकर बिक्री करते हैं। इसके साथ ही आदिवासी लोगों को फ्री में शराब का लालच देकर उन्हें भी शराब बिक्री का कारोबार करा रहे हैं।

हाल ही में 8 नंबर आदिवासी दफाई की महिलाओं ने कच्ची शराब बिक्री के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीन बोरों में भरे शराब के पाउच नष्ट कर दिए थे साथ ही छीमक बस स्टैंड पर जाम लगाने की कोशिश की थी। इन महिलाओं का कहना था कि शराब पीने के आदी होने से उनके पुरुष घर का सामान तक बेच रहे हैं साथ ही घर में मारपीटकर शांति भंग करते हैं।

वैसे तो हर गांव में कच्ची शराब बिक रही है लेकिन सर्वाधिक शराब घरसौदी आदिवासी दफाई, पांच नंबर आदिवासी दफाई, छीमक और सुनवई के बीच कंजरों के ढेरों महाराजपुर की आदिवासी दफाई की नहर पर खुलेआम कच्ची शराब कंजरों द्वारा बेची जा रही है ।नगरीय इलाकों तक पहुंच रही कच्ची शराबः कंजरों द्वारा बनाई जा रही कच्ची शराब गांवों व आदिवासी दफाई ही नहीं नगरीय इलाकों में भी चोरी-छिपे सप्लाई की जा रही है। शराब की दुकानें बंद होने का लाभ शराब माफिया उठा रहे हैं। न सिर्फ शराब की सप्लाई की जा रही है बल्कि महंगी भी बेची जा रही है।