मोहब्बत को बदनाम करने वाला ऐसा खौफनाक मंजर अपने पहले कभी देखा सुना नहीं होगा

मोहब्बत को बदनाम करने वाला ऐसा खौफनाक मंजर शायद ही कभी देखा-सुना गया हो गया। जिसमें एक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका की हत्या का राज छिपाने के लिए न सिर्फ उसके समूचे परिवार को बल्कि तीन अन्य लोगों को भी मौत की नींद सुला दिया। नौ सामूहिक हत्याकांड को आरोपी ने छिपाने की पूरी कोशिश भी की किन्तु पुलिस की गहन पड़ताल के बाद इससे पर्दा उठ गया। पुलिस ने प्रेमिका की हत्या का राज छिपाने के लिए नौ अन्य लोगों की हत्या करने के इस आरोपी से आखिर सच उगलवा कर गिरफ्तार कर लिया।
रोंगटे खड़े कर देने वाले इस हत्याकांड के सभी मृतक तथा पकड़ा गया आरोपी भी अप्रवासी मजदूर है। पुलिस को सामूहिक हत्या का मामले को सुलझाने में पसीने आ गए। आखिर कॉल डिटेल के आधार पर हिरासत में लिए गए बिहार के श्रमिक ने कड़ी पूछताछ के बाद प्रेमिका के अलावा नौ अन्य लोगों की हत्या का राज उगल दिया। गौरतलब है कि 21 मई को पुलिस को तेलंगाना के वरंगल के गोरेकुर्टा क्षेत्र में एक कुए में कुछ लाशें होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने लगातार दो दिन तक इस कुए से कुल 9 लाशें बरामद की। सभी लाशों का पोस्टमार्टम कराया गया। जिससे यह पता चला कि कुएं में गिरने से पहले सभी जीवित थे। उनकी मौत बाद में हुई है। इन शवों की शिनाख्त में पुलिस को पता चला कि इनमें छह लोग एक ही परिवार के हैं और तीन अन्य लोग अलग हैं।

पुलिस ने कुए से मोहम्मद मकसूद के परिवार के छह लोग तथा तीन अन्य श्रमिकों के शव बरामद किए थे। मौके से मिल दो मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाने और आस-पास के सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया। सीसीटीवी फुटेज में साइकिल से एक व्यक्ति के हत्या वाले दिन और उससे अगले दिन आने-जाने के फुटेज मिले। पुलिस ने इस आधार पर बिहार के रहने वाले संजय को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की सख्ती के सामने वह झूठ पर टिक नहीं सका। पुलिस के मुताबिक आरोपी और व्यस्क मृतक सभी जूट फैक्ट्री में मजदूरी करते थे। इसी फैक्ट्री में मकसूद की साली रफीका श्रमिकों को खाना खिलाती थी। इस दौरान संजय के और रफीका के निजी संबंध बन गए। 

संजय की बुरी नजर रफीका की नाबालिग बेटी पर भी थी। किन्तु रफीका उसे रास्ते का कांटा नजर आ रही थी। रफीका को ठिकाने लगाने के लिए संजय बेटी का रिश्ता देखने के बहाने से उसे पश्चिमी बंगाल ले गया। 7 मई को ट्रेन में रफीका को नींद की गोली खिलाने के बाद उसका गला घोट कर उसे चलती ट्रेन से धकेल दिया। आँध्रप्रदेश के ताड़ेपल्लीपुरम रेलवे पुलिस थाने ने रफीका का शव बरामद किया पर उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी। इधर संजय अकेला वापस आया तो मकसूद की पत्नी निशा ने संजय से अपनी छोटी बहन रफीका के बारे में पूछताछ की। संजय उसे गुमराह करता रहा। अंतत: जब निशा ने ज्यादा दवाब डालना शुरु किया तो उसने सबकी हत्या की साजिश रच ली।

20 मई को मकसूद के बेटे शाबाज के जन्मदिन पर खाने के आयोजन में संजय सहित कुछ दूसरे मजदूर भी शामिल हुए। खाने में मदद कराने की आड़ में संजय ने नींद की गोलियां मिला दी। इस बाद शुरु हुआ उसका शैतानी तांडव। आरोपी ने बेहोश हो जाने के बाद रात्रि को एक-एक करके कुल नौ लोगों को कुए में धकेल दिया। इनमें मरने श्रीराम और श्याम बिहार से आये मजदूर थे, जबकि शकील त्रिपुरा का निवासी था। पुलिस ने संदेह के आधार पर पहले ही संजय को हिरासत में ले रखा था। हत्याओं की पुष्टि के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उससे चार मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।