लॉकडाउन में लड़के को रिश्तेदारों ने घर से निकाला, जानिए किसने भटकते लाल को परिजनों से मिलवाया

कोरोना महामारी के चलते दुनिया कई तरीके से प्रभावित हो रही है. इस संकट की घड़ी में अपने परायों की भी पहचान हो रही है. ऐसी दुखद स्थिति का सामना एक 12 साल के बच्चे ने भी किया. कोरोना पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने देशभर में 25 मार्च को लॉकडाउन लागू कर दिया था. अभी लॉकडाउन की वजह से काम बंद होने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूर अपने अपने राज्यों की ओर पलायन करने पर मजबूर हो गए. 
लाखों लोग अब भी कहीं न कहीं फंसे हुए हैं. ऐसे में जिसे भी मौका मिला वो पैदल ही अपेन घरों की ओर निकल पड़ा. लॉकडाउन से पहले दिल्ली में रहने वाला एक मजदूर परिवार अपने मासूम बच्चे को रिश्तेदार के घर छोड़कर चला गया था. बच्चे के मां-बाप के जाने के बाद रिश्तेदारों ने उसे घर से बाहर निकाल दिया. ऐसे में बच्चे को कई दिनों तक पार्क में रहकर समय गुजारना पड़ा.

ओडिशा कैडर के IPS अधिकारी अरुण बोथरा ने ट्विटर हैंडल के जरिए उस बच्चे की कहानी शेयर की. उन्होंने बताया कि रिश्तेदारों के द्वारा 12 साल के बच्चे को घर से बाहर निकाला गया तो बच्चा द्वारका के एक पार्क में रहने लगा. इस दौरान कई दिनों तक भूखे पेट पार्क की बेंच पर सोकर मासूम को दिन गुजारने पड़े, लेकिन आखिर में आईपीएस अधिकारी की सहायता से बच्चे के माता-पिता को उनसे मिलवाया गया.

आईपीएस के मुताबिक दिल्ली की एक महिला योगिता ने कुत्तों को खाने देते समय बच्चे को वहां देखा. उन्होंने हफ्तों तक उसे खाना दिया. बच्चे की हालत देखकर स्नेहा ने एक इंडिया केयर्स को ट्विटर टैग कर इसकी जानकारी देकर बच्चे को उसके मां-बाप से मिलवाने की मदद मांगी थी. पुलिस को पता चला कि उसका परिवार समस्तीपुर में था. इसलिए आईपीएस अधिकारी संजय ने उसके परिवार को बच्चे से पार्क में मिलवाया.