अपने मालिक से ऑटो मांगकर गुर पहुंचा राजेश, बोला 'वापस दिल्ली जाउंगा लेकिन सिर्फ ऑटो लौटाने'

कोरोना महामारी के बाद लॉकडाउन में काम बंद होने से रोजी-रोटी की तलाश में परदेस गए मजदूर अब लगातार अलग-अलग माध्यमों से घर लौटने लगे हैं. घर लौटने वालो की संख्या कटिहार में हज़ारों में हैं ऐसे में जिसे ट्रेन या बस की सेवा मिली है वो बेहद किस्मत वाले हैं लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि लोग किसी तरह परदेस में रुकने के लिए तैयार नही है और जिसके पास जो सुविधा है उसी के सहारे बस निकल पड़े हैं घर के लिए.
इसी बीच कटिहार हसनगंज के रहने वाले राजेश कुमार शर्मा ने ऑटो से ही "दिल्ली टू कटिहार" का सफर पूरा कर लिया. चार दिन के इस सफर के बारे में राजेश ने बताया कि वो दिल्ली में प्रति दिन 400 रुपए की दिहाड़ी पर ऑटो चलाता था. कोरोना बंदी में जब सब कुछ बंद होकर भुखमरी की समस्या होने लगी तो वो मालिक से ऑटो लेकर दिल्ली से कटिहार के सफर पर निकल पड़े. राजेश ने कहा कि वो न सिर्फ़ ऑटो से सफर करके कटिहार पहुंचे बल्कि साथ में दिल्ली में रहने वाले अपने गांव के अन्य मजदूर चंदन यादव, मनोज कुमार मण्डल, विनोद मण्डल, रवि साह और संतोष जो कि दिल्ली में सरिया बांधने का काम करते थे, उन लोगों को भी ले आया.

राजेश ने कहा कि लॉकडाउन में सब काम बंद होने से रोजी-रोटी पर संकट हो गया. अब तो वहां घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था. एक कमरे के रूम में किसी तरह सभी छह लोग रहने पर विवश थे. सरकार द्वारा मजदूरों को वापसी की घोषणा से कुछ राहत मिला परन्तु आने का कोई उपाय नही मिलने से जिस मालिक का ऑटो चलाते थें उससे ही घर निकलने का मन बना लिया और चार दिन चल कर दिल्ली से कटिहार पहुंचे.

राजेश ने कहा कि रास्ते मे जगह-जगह बने चेकपोस्ट पर जांच भी हुई लेकिन सब को सच बयां करते गया तो किसी ने नहीं रोका और अब कटिहार हसनगंज पहुंच चुके है. राजेश कहते हैं कि हालात ठीक होते ही मालिक का ऑटो दिल्ली पहुंचा दूंगा लेकिन अब परदेस में काम नही करूंगा.