कोरोना के समय गुफा में रहने को मजबूर परिवार, कंद मूल खाकर कर रहे हैं गुजारा

गांव में झगड़ा हुआ तो एक परिवार भाग कर 20 दिन पहले जंगल में चला गया और वहां एक गुफा में रहने लगा. इस परिवार में 7 सदस्य हैं और इनके पास आधार कार्ड और अंत्योदय कार्ड भी है लेकिन फिर भी यह आदिमानवों की तरह एक गुफा में रहने को मजबूर हैं. यह परिवार ओडिशा-झारखंड सीमा पर रहते हुए मिला. झारखंड में जमशेदपुर से करीबन 120 किलोमीटर दूर जमीन से 1200 से 1400 फ़ीट की ऊंचाई पर बसा मकारगोडा गांव पूर्ण रूप से ओडिशा के मयूरभंज जिले के अंतर्गत आता है और थाना भी गुरमा शीनी पड़ता है.
सबर परिवार के लोग ओडिशा से भाग कर झारखंड और ओडिशा की सीमा पर आकर एक गुफा में रह रहे हैं. ओडिशा सरकार से इनका आधारकार्ड और अंत्योदय कार्ड भी बना है लेकिन सबर परिवार उनके ही सबर लोगों से झगड़ा होने के कारण वहां से भाग करके मकारगोडा के जंगल में आ कर बस गया है. इस परिवार में कुल सात लोग हैं, जिसमें महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हैं. 
बच्चों और पुरुषों के तन पर कपड़ा भी नहीं है. यह लोग जंगल से कंद-मूल लाकर खाते हैं. ये लोग पूरी तरह से आदिम जनजाति के नजर आते हैं, जो जंगल से बाहर आना नहीं चाहते हैं. यह गांव से भाग कर गुफा में रह रहे हैं. वहीं खाना बनाने से लेकर सोने का काम करते हैं. सुबह-सुबह पुरुष जंगल में चले जाते हैं. वह जड़ी बूटी और कन्द-मूल खोज कर लेकर आते हैं और यहां परिवार के साथ रहते हैं. इनके साथ भाषा की भी काफी दिक्कत है.
पोटका विधानसभा से विधायक संजीव सरदार ने बताया कि हमारी विधानसभा से सटा जो जंगल है, वहां एक परिवार गुफा में रह रहा है. तकनीकी रूप से यह ओडिशा राज्य के रहने वाले हैं लेकिन यह हमारी विधानसभा से सटे हैं. जब तक यह हमारी विधानसभा की सीमा पर रहेंगे, हम इन्हें खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं होने देंगे.