लॉकडाउन में नौकरी गई तो सब्जी और आचार बेचने लग गईं सुनीता, महिलाओं के लिए बनीं मिसाल

हिमाचल प्रदेश के ऊनाजिला के गांव जलग्रां की सुनीता लॉकडाउन के बीच नौकरी से हाथ धोने वाली महिलाओं के लिए मिसाल बनकर उभरी है. औद्योगिक क्षेत्र मैहतपुर के उद्योग में काम करने वाली सुनीता और निजी बस पर बतौर चालक काम करने वाले उसके पति लॉकडाउन के चलते काम धंधा बंद होने के कारण घर बैठ गए. लेकिन सुनीता ने मेहनत करने की ठानी और लॉकडाउन के बीच लोगों के घर द्वार पर सब्जी, फल और आचार बेचने का निर्णय लिया. 
आज सुनीता जहाँ अपनी मेहनत के दम पर अपने परिवार का पालन पोषण कर रही है, वहीँ महिला शक्ति में नई ऊर्जा के संचार में भी अपना योगदान दे रही है. ऊना के गांव जलग्रां टब्बा की सुनीता देवी के पास कोई काम नहीं था. वहीँ सुनीता का पति निजी बस का चालक है और लॉकडाउन के कारण वो नौकरी पर तो जा नहीं पा रहे हैं और बीमार भी हैं. एक तो गरीबी और ऊपर से इस दंपति के पास कोई काम भी नहीं था, लेकिन बावजूद इसके सुनीता ने हिम्मत दिखाई और लॉकडाउन के बीच ही स्कूटी पर सवार होकर लोगों को घर द्वार पर सब्जी, फल और आचार पहुंचाने की योजना बनाई.

सुनीता आज अपनी मेहनत और हिम्मत के बल पर ही तीन बच्चों सहित परिवार का पालन पोषण कर रही है. सुबह सूरज की किरणें निकलने से पहले ही सुनीता घर के काम काज निपटा कर सब्जी मंडी पहुंचती है. इसके बाद गांव-गांव घूम कर सब्जी और फल बेचती है. दो पैसे अधिक कमा ले, इसको लेकर सुनीता घर का बनाया हुआ आचार भी डिब्बे में लेकर चलती है, ताकि कोई खरीददारी कर लें. 
सुनीता की माने तो लॉकडाउन के बीच सरकार द्वारा राशन तो मिल ही रहा है लेकिन अपनी और परिवार की अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने यह काम शुरू किया है. सुनीता ने बेरोजगारों को घर पर बैठे रहने की बजाय काम करने का संदेश दिया है, ताकि लोग आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो सके. सुनीता की हिम्मत और मेहनत को देखकर लोग भी उसकी प्रशंसा कर रहे है. स्थानीय लोगों की मानें तो इंसान को काम करने में कोई शर्म नहीं करनी चाहिए और मेहनत के दम पर आगे बढ़ना चाहिए.