"क्या करें साहब! घर की याद और रोटी बड़ी जरूरी है" साइकिल पर पत्नी और बच्चों को बैठाकर घर के लिए निकल पड़ा ये मजदूर

बरेली जाने के लिए साइकिल पर अपनी पत्नी और दो बच्चों को बैठाकर कचहेरी चौक से गुजरते हुए राजेश.
हिसार. जब दो मासूम बच्चे और अपनी पत्नी को साइकिल पर बैठाए जा रहा एक व्यक्ति जब हांसी से गुजरा तो हर किसी नजर उसकी और थी. साइकिल चला रहे राजेश की आंखों में आंसू झलक रहे थे और बेतहाशा बोझ से लदी साइकिल को खिंचे जा रहा था. 
हांसी पहुंचते तोशाम चुंगी पर पुलिस ने उसे रोक दिया और वापस जाने के निर्देश दिए. आंखों में आंसू लेकर राजेश निराश होकर वापस मुड़ लिया. राजेश के अलावा पैदल जा रहे अन्य प्रवासी मजदूरों को भी पुलिस ने बैरंग वापास भेज दिया. प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने का काम शुरु हो चुका है. हांसी में रहने वाले बिहार मूल के 145 मजदूरों सहित ट्रेन बुधवार को रवाना हो चुकी है. लेकिन अन्य प्रदेशों के सैंकड़ों श्रमिक पैदल ही अपने घरों की तरफ निकल रहे हैं. बुधवार को हिसार से यूपी के बरेली जिले में जा रहे श्रमिकों को हांसी पुलिस ने रोक लिया.

मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी ने उन्हें वापस जाने के निर्देश दिए. जिसके बाद मजदूर निराश होकर वापस लौट गए. यूपी के बरेली जिले में जा रहे साधुराम ने कहा कि वह पूरी रात 30 किमी पैदल चलकर यहां पहुंचे थे अब वापस इतनी दूरी जाना होगा. उन्होंने कहा कि मकान मालिकों ने किराये के नाम पर घर छोड़ने के लिए बोल दिया है और अब उनके पास कमाने का कोई जरिया भी नहीं बचा हुआ. मजदूरों ने कहा कि कई बार आधार कार्ड जमा करवा चुके हैं लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई जवाब नहीं मिल रहा.

बता दें कि इस तरह का एक मामला चरखी दादरी से भी सामने आया था. जहां संजय रामफल नाम का एक शख्स तीन माहीने पूर्व एक बड़े बजट की फिल्म का ऑडिशन देने के लिए मुंबई गया था. फाइनल ऑडिशन होने के बाद जब उसे घर आना था, तो देश में लॉकडाउन लागू हो गया. ऐसे में उसे काफी परेशानियां हुईं. उधर, घर से फोन गया कि मां बीमार है. मां से मिलने के लिए उसने किसी भी तरह दादरी आने की ठानी और वो साइकिल से चरखी दादरी पहुंचा.