लॉकडाउन में मेंढक की तरह चलकर गया पुजारी तो थानेदार को पड़ गया भारी, लाइन हाजिर

यूपी के कानपुर में पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया है। लॉकडाउन के नाम पर कई जगह पुलिस लोगों का उत्पीड़न कर रही है। मामला कानपुर का है, जहां बुधवार को कानपुर के पनकी प्रभारी निरीक्षक मंदिर जा रहे एक बुजर्ग को उन्होंने नियमों का हवाला देकर न केवल अपमानित किया, बल्कि बुजुर्ग को मेंढक की चाल चलकर मंदिर तक जाने का फरमान भी सुना डाला।
इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरस हो रहा है, लोग इसकी निंदा कर रहे हैं। वहीं जब से वीडियो प्रशासन तक पहुंचा तो सब सकते में आ गए। एडीजी व डीएम ने इस मामले में तुरंत जांच के आदेश दिए। एसएसपी (SSP) ने मामले में सीओ की रिपोर्ट पर थानाध्यक्ष, पनकी विनोद कुमार सिंह को लाइन हाजिर कर दिया है। 

वायरल वीडियो के मुताबिक, पनकी थाने के थानेदार विनोद कुमार सिंह मंदिर जा रहे बुजुर्ग को बीच रास्ते में रोककर उसे पूछते हैं कि हाथ में फूल की थाली और लोटे में जल, कहां जा रहे हो? बुजुर्ग ने बताया कि मंदिर के बाहर पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाने जा रहा हूं, लेकिन लॉकडाउन की दुहाई देते हुए थानेदार ने पहले तो बुजुर्ग को भला बुरा कहा और उससे माफी तक मंगवाई। इसके बाद उसके पूजा की थाली पर जल पलट दिया और कहा कि भगवान अपने भक्तों की परीक्षा लेता है। इसलिए उन्हें भी परीक्षा देनी होगी। थानेदार ने बुजुर्ग को मेढक की तरह चलते हुए मंदिर तक जाने को कहा। मिन्नतों के बाद भी थानेदार नहीं माने और बुजुर्ग को मेढक की तरह चलकर मंदिर तक जाना पड़ा। 
ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि लॉकडाउन में क्या पुलिस को लोगों की भावनाओं से खेलने का भी अधिकार मिल गया है। क्या पुलिस को बुजुर्गों को अपमानित करने का भी हक मिल गया है। कानपुर में एक बुजुर्ग के साथ पुलिस का ऐसा अमानवीय व्यवहार बेहद निंदनीय है।  पुलिस ने अकेले पूजा करने जा रहे व्यक्ति की थाली का जल उड़ेल दिया, झुक कर चलवाया, फिर भी व्यक्ति शांति से आगे चला गया क्यूँकि उसे मालूम था कि कहीं न कहीं वह नियमों का उल्लंघन कर रहा है।अगर ‘सहिष्णुता’ शब्द की परिभाषा जाननी हो तो यह वीडियो देख लो।