लॉकडाउन में हजारा नहर की मछली बन गई है लोगों की रोजी रोटी का साधन

कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम को लॉकडाउन चल रहा है। महानगरों में काम छूटने पर लोग गांव में पहुंच गए हैं।खाली बैठे ये युवा मछली पकड़कर कमाई कर रहे हैं। कामधंधा छिनने के बाद बाहर से लौटे ये बेरोजगार नहर, नदी और तालाब किनारे बैठकर मछली पकड़ रहे हैं। इनकी तादाद सैकड़ों में है। मछली बेचकर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। जिले में नहर, नदी और तालाब के किनारे रहने वाले युवा लॉकडाउन में घर में खाली समय में मछली पकड़ने का शौक पूरा कर रहे हैं। 
हजारा नहर में मछलियों की तादाद अधिक होने के कारण युवा इसी को अपना माध्यम बना रहे हैं। कासगंज जिले से होती हुई एटा से फिरोजाबाद, मैनपुरी जाने वाली हजारा नहर की दोनों शाखाओं पर सैकड़ों युवा कांटे डालकर मछली आने का इंतजार करते देखे जा सकते हैं। जैसे ही इनके कांटे में मछली फंस जाती है। यह तत्परता दिखाते हुए कांटे को खींचकर मछली को निकालकर सुरक्षित रख लेते है। उसके बाद दूसरी मछली फंसने की प्रक्रिया शुरू कर देते है।

मछली फंसने के तक युवा पूरे धैर्य के साथ नहर, नदी किनारे बैठकर इंतजार करते है। इनका इंतजार कितना लंबा हो इसका कोई पता नहीं। उनके इंतजार की थकान मछली फंसते ही पलभर में काफू र हो जाती है। मछली आने के बाद यह पूरे जोश के साथ काम में जुट जाते हैं। किसी-किसी युवा को तो पूरे दिन इंतजार करने के बाद एक भी मछली नहीं फंसती है। उसके बाद भी वह अगले दिन इस शौक को पूरा करने नदी, नहर पर पहुंचता है। लॉक डाउन में युवाओं को यह शौक पूरा करते देखा जा सकता है।