चेन्नई से साइकिल से चलकर पहुंचे तीन श्रमिक, उनकी यह दास्तां कर देगी आपको भी हैरान

कोरोना वायरस की वजह से फैली महामारी के कारण पूरा देश लॉक डाउन है। ऐसे में अपने से हजारों किलोमीटर दूर रहने वाला व्यक्ति कितनी खौफ में रह रहा होगा इसका अंदाजा तो लगाया जा सकता है। ऐसी ही कठिन परिस्थिति का सामना कर रहे कुछ युवकों को जब वापस आने का कोई रास्ता नही दिखाई पड़ा तो इन युवा मजदूरों ने ऐसा कड़ा फैसला लिया कि सोंच कर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जायें। प्रदेश के संतकबीर नगर जिले के लगभग दर्जन भर निवासी युवक चेन्नई शहर में ही एक कंपनी में काम करते थे। 
अचानक लॉक डाउन होने से पूरा चेन्नई शहर और सारा कारोबार बंद हो गया। इन युवकों की कंपनी का काम भी बंद हुआ तो कंपनी के मालिक ने कुछ दिन तो इनको खाना खिलाया, लेकिन बाद में खाना देने से मना कर दिया। इस अनजान शहर में जब तक युवकों के पास पैसा रहा तबतक तो ये खाने पीने को मोहताज नही थे, लेकिन जैसे ही इनके पैसे खत्म हुए, इनके सामने भुखमरी जैसी समस्या आ गई। इस संकट से बचने के लिए युवकों नगर से पैसे मंगाए और एक एक साइकिल खरीद कर चेन्नई से संतकबीर नगर के लिए निकल लिए।

चेन्नई से चलने के बाद ये युवक रात दिन साइकिल चलाते हुए कभी कहीं कुछ मिल गया तो खा लिए वर्ना बिना खाये ही चलते रहे। 26 दिन के सफर के बाद ये 20 मई को प्रयागराज पहुंचे, जहां इन्हें कुछ समाज सेवियों ने खाना खिलाया और वहां से जौनपुर होते हुए रात में 9 बजे इनमें से तीन युवक अम्बेडकर नगर के टांडा कस्बे में पहुंचे, जहां चौक घंटाघर पर संत कबीर नगर जाने का रास्ता पूछने के दौरान अपनी अविश्वसनीय यात्रा के बारे में बताया। चौक में मौजूद समाजसेवी संस्था के अंशू बग्गा ने अपने सहयोगियों की मदद से इन युवकों को खाना खिलाने के साथ भरपूर मदद की और रात्रि 10 बजे उनकी मंगल यात्रा की कामना के साथ संत कबीर नगर के लिए रवाना किया।