लॉकडाउन ने खाने को हुए मोहताज, दाह संस्कार के पैसे नहीं थे तो घर में ही दफना दिया भाई का शव

इसे मजबूरी कहें या बेबसी! कोरोना संकट के दौरान लॉकडाउन ने रोजगार छीन लिया, कामकाज ठप पड़ा तो फूटी कौड़ी के भी मोहताज हो गए। ऐसे में भाई की मौत पर दाह संस्कार के लिए पैसे जुटाना भी मुश्किल हो गया। घर में पैसे नहीं रहने से भाई और भतीजे ने गुड्डू मंडल (30) के शव को घर में ही दफना दिया। पड़ोस के लोगों को इसकी सूचना भी दे दी। घटना इशाकचक थाना क्षेत्र के विषहरी स्थान व्यायामशाला गली स्थित झोपड़पट्टी की है।
मानसिक रूप से कमजोर और बीमार गुड्डू मंडल सड़क किनारे से कचरा बीनने का काम करता था। शुक्रवार की रात में उसे मिरगी का दौरा आया। पैर-हाथ दबाने और पानी डालने के बाद होश आ गया। रात में वह सो गया था लेकिन सुबह परिवार वाले जब उठे तो उसकी मौत हो गई थी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के पास एक रुपया नहीं था। पड़ोसियों की मानें तो परिवार के सभी सदस्य मंद बुद्धि हैं। गुड्डू मंडल की 10 साल पहले शादी हुई थी लेकिन बीमारी के कारण पत्नी भाग गई। घर में कोई महिला नहीं है। 

शनिवार सुबह छह बजे भाई ओमप्रकाश मंडल, भतीजा नीरज व राजा ने घर में ही एक फीट लंबा गड्ढा खोदकर शव को दफना दिया। इंस्पेक्टर ने कहा कि गुड्डू मंडल के शरीर पर जख्म का निशान नहीं था लेकिन मुंह से झाग निकल रहा था। सूचना पर सिटी डीएसपी राजवंशी सिंह व इंस्पेक्टर भी पहुंचे। शव को निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। डीएसपी ने बताया कि परिवार के लोगों से बात की गई। भाई-भतीजा सीधे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कारणों का पता चल सकेगा।

गुड्डू के दो भाई ओमप्रकाश मंडल और अजय मंडल ठेला चलाते हैं। लॉकडाउन में दो महीने घर में बैठ गया। झोपड़ी में एक खाट भी नहीं थी। सभी लोग नीचे जमीन पर बोरा बिछाकर सोते हैं। गड्ढा खोदकर चूल्हा बना था लेकिन कई दिनों से खाना नहीं बना। ओमप्रकाश के पुत्र नीरज ने कहा कि इधर-उधर से मांगकर खाना खाते थे अब कोई पैसा भी नहीं देता। घटना के बाद झोपड़पट्टी में लोगों की भीड़ जुट गई लेकिन मदद के लिए कोई सामने नहीं आया। जबकि मोहल्ला समृद्ध माना जाता है। पुलिस के सामने कई लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। दोनों भाइयों ने कहा कि लॉकडाउन में ठेला नहीं चल रहा था। घर में एक पैसा नहीं है। दाह-संस्कार व श्राद्ध कहां से कर पाएंगे।