लॉकडाउन के समय कुशीनगर के बाद महराजगंज में भी दिखा एक GPS लगा हुआ गिद्ध

कुशीनगर के बरवापट्टी क्षेत्र के बाद महराजगंज के सोनौली बार्डर पर भी जीपीएस लगा गिद्ध दिखा है। इससे कौतूहल की स्थिति बनी गई। पर कुछ देर बाद यह पता चला कि यह गिद्ध नेपाल का है। नेपाल के चितवन में इन दिनों गिद्धों पर रिसर्च चल रहा है। नेपाल के चितवन में गिद्धों की ट्रैकिंग के लिए शोधकर्ताओं ने जीपीएस लगाया है। 
नेपाल के शोधकर्ताओं के मुताबिक गिद्ध 17 सौ किमी क्षेत्रफल को कवर कर चुके हैं। नेपाल के पक्षी विशेषज्ञों के मुताबिक गिद्धों को बचाने के लिए मुहिम छेड़ी है। इसके शोध कार्य भी जारी हैं। काले व सफेद गिद्धों पर अध्ययन व उनकी ट्रैकिंग के लिए सेटेलाइट ट्रांसमीटर लगाया गया है। जीपीएस से गिद्ध मानीटर किए जा रहे हैं। सोनौली कस्बे के ऋषभ गुप्ता, संजय साहू, नंदकिशोर गुप्ता आदि ने सोनौली पुलिस चौकी के बगल में एक मकान पर गिद्ध के पंख पर जीपीएस देख सुरक्षा कर्मियों को जानकारी दी। 

नेपाल पक्षी संरक्षण बीएनसी के वैज्ञानिक ने बताया कि जीपीएस से गिद्धों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। जिस क्षेत्र में अधिक गिद्ध मिलने की सूचनाए मिल रही हैं, उस क्षेत्र को गिद्धों के पनाहगार एरिया घोषित किया जा रहा है। पश्चिम नेपाल क्षेत्र को गिद्धों का सुरक्षित एरिया घोषित किया जा चुका है। 

भारत में इन दिनों टैग व जीपीएस लगे जो गिद्ध दिखाई दे रहे हैं, उसमें से अधिकांश गिद्ध नेपाल के चितवन वर्ड कंर्जवेशन सेंटर के हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि यह गिद्ध भारत के कई प्रांतों के अलावा पाकिस्तान तक उड़ान भर चुके हैं। जीपीएस से उनकी यात्रा की गतिविधियों की जानकारी मिल रही है। नेपाल में तराई क्षेत्र की तुलना में पहाड़ों पर विलुप्त हो रहे दुर्लभ गिद्धों की संख्या ज्यादा है।