सड़क पर टेंट लगाकर हुई डिलीवरी, मां ने डिलिवरी कराने वालो IPS के नाम पर रख दिया बेटी का नाम

जानकारी के अनुसार राजस्थान के बाड़मेर जिले के गांव थोरियों की ढाणी नैनू कंवर के 4 मई को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इस पर नैनू कंवर को उसका भाई शैतानसिंह गाड़ी से कल्याणपुर के अस्पताल लेकर गया, जहां से उसे जोधपुर रैफर कर दिया। जोधपुर के अस्पताल में ले जाते समय रास्ते में आखलिया चौराहा पर गाड़ी खराब हो गई और नैनू कंवर की प्रसव पीड़ा बढ़ गई। ऐसे में गाड़ी बीच सड़क पर रुक गई। इसी दौरान आखलिया चौराहे पर जोधपुर डीसीपी आईपीएस प्रीति चंद्रा लॉकडाउन के चलते गश्त पर थीं।
आखलिया चौराहे पर तैनात डीसीपी प्रीति चन्द्रा को जब पता चला कि प्रसूता को अस्पताल पहुंचा पाना भी संभव नहीं है। ऐसे में डीसीपी ने महिला कांस्टेबल सुगना व सुशीला की मदद से सड़क पर ही सुरक्षित प्रसव करवाया। इससे पहले पुलिसकर्मियों की मदद से सड़क पर प्रसूता की गाड़ी के चारों तरफ टेंट लगवाया गया। नैनू कंवर ने बेटी को जन्म दिया। इसके बाद तुरंत पास के निजी डॉक्टर को चौराहा पर ही बुलाया और बच्ची व नैनू कंवर की जांच करवाई। फिर एंबुलेंस से उसे निजी अस्पताल भेजा।
मीडिया से बातचीत में नैनू कंवर ने बताया कि वे जोधपुर पुलिस की शुक्रगुजार हैं। खासकर डीसीपी प्रीति चन्द्रा की। 4 मई को अस्पताल जाते समय गाड़ी खराब हो जाने पर डीसीपी प्रीति चन्द्रा की मदद से सुरक्षित डिलीवरी हो सकी। इसलिए मेरे परिवार ने तय किया है कि बच्ची का नाम प्रीति सिंह राठौड़ रखेंगे। यह नाम डीसीपी प्रीति चन्द्रा को समर्पित है।
आपको बता दें कि आईपीएस प्रीति चंद्रा मूलरूप से सीकर जिले के गांव कुदन की रहने वाली हैं। 1979 को जन्मी प्रीति चंद्रा के​ पिता रामचंद्र सूंडा भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं। प्रीति ने शुरुआत में पत्रकारिता को बतौर कॅरियर चुना, मगर ​मन में कुछ बड़ा करने का जुनून था। 
वर्ष 2008 में इन्होंने बिना किसी कोचिंग के पहले ही बार के प्रयास में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण करके कमाल कर दिखाया। जोधपुर डीसीपी से पहले प्रीति करौली जिले में एसपी रहते हुए खुद चंबल के बिहड़ में उतरकर डकैतों का सफाया किया था। इसके अलावा प्रीति जयपुर इंटेलिजेंस विभाग व बूंदी में एसपी भी रह चुकी हैं।