लॉकडाउन में दिल्ली से गांव लौटते ही बहू बन गई 'बिजली दीदी' जानिए क्या काम करती हैं

दिल्ली में परिवार के साथ एक जूता फैक्ट्री में दिहाड़ी पर काम करने वाली जमालपुर गांव की बहू को गांव के स्वयं सहायता समूह का सहयोग मिला तो स्वावलंबी बन गई। जिसको कोई पूछता नहीं था अब इस महिला मिस्त्री की कद्र पूरा गांव करता है। उसने गांव में एलईडी बल्व रिपेयर करने शुरू कर दिए, जिसके लिए मात्र कुछ दिनों का प्रशिक्षण लेना पड़ा। गांव में उसे बिजली दीदी के नाम से बुलाते हैं।
बड़ोखर ब्लाक के गांव जमालपुर की रानी देवी अपने पति सभाजीत के साथ वापस गांव लौटी तो यहां रोजगार का संकट था। दिल्ली में वह पति के साथ जूता फैक्ट्री में रंगाई का काम करती थी। कोरोना काल में वह पति व तीन बच्चों के साथ 18 अप्रैल को वापस गांव लौटी थी। यहां उसने काम करने की ठानी। पहले तो परिवार व गांव में बहू के काम करने का विरोध हुआ पर उसके हौसले को देख सभी सहयोग में खड़े हो गए। 

वह महिला स्वयं सहायता समूह के संपर्क में आई। आठवीं तक शिक्षित रानी देवी ने एनआरएलएम उपायुक्त से मुलाकात की। उसकी दक्षता देख  राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त केके पांडेय ने एलईडी बल्ब निर्माण व मरम्मत का प्रशिक्षण आईटीआई बांदा से दिलाया। 10 जून से उसने गांव में विधिवत काम शुरू कर दिया। वह एलईडी बल्ब निर्माण एवं मरम्मत, बिजली बोर्ड मरम्मत एवं अन्य बिजली के कार्य गांव में रहकर करने लगी। उसकी कुशलता देख अब गांव बहू को लोग बिजली दीदी के नाम से पुकारने लगे। 

अब उसके परिवार को भी उस पर गर्व है। उसे एक बल्ब बनाने के तीन रुपये मिलेगा। बकौल रानी औसतन उसे दो से तीन सौ रुपए रोजाना कमाई हो जाती है। भविष्य में और बेहतर काम करने पर आय बढेगी। गांव में खाली बैठने से अच्छा है कि कुछ काम करें। उपायुक्त ने बताया कि संकुल संघ द्वारा बल्ब निर्माण के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराया जाएगा ताकि उसका काम बढ़ सके।